॥ दोहा ॥
नमो नमो विन्ध्येश्वरी,नमो नमो जगदम्ब।
सन्तजनों के काज में,माँ करती नहीं विलम्ब॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय विन्ध्याचल रानी।आदि शक्ति जग विदित भवानी॥
सिंहवाहिनी जै जग माता।जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥
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